Amazing facts in Hindi 2022 – वैज्ञानिक रहस्य के बारे शिवलिंग से समझिए

इसरो से लेकर नासा तक दुनिया के तमाम वैज्ञानिक इस बात से सहमत हैं कि जिस आकृति को भगवान शिव और शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। वह कोई काल्पनिक देवता नहीं बल्कि अपने आप में एक संपूर्ण विज्ञान है। इस प्रकार विज्ञान की पूजा भगवान शिव के रूप में की जाती है। यही कारण है कि शिव की पूजा और विज्ञान के अध्ययन के लिए वर्ष में 1 महीने का समय निर्धारित किया गया है जिसे श्रावण मास कहा जाता है।

Amazing facts in Hindi

Shivling Amazing facts in Hindi

ज्योतिर्लिंग और स्वयंभू शिवलिंग के बारे में तो सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्राचीन काल में शिवलिंग का निर्माण कैसे हुआ था। कैप्सूल के आकार का गोल पत्थर जो ऊपर दिखाई देता है वह शिवलिंग नहीं है। निचला हिस्सा चार भुजाओं का होता है और मध्य भाग भुजाओं का होता है जो एक आसन पर बनी होती हैं। कैप्सूल की तरह दिखने वाले ऊपरी हिस्से की पूजा की जाती है। शिवलिंग न केवल भारत और श्रीलंका में पाया जाता है बल्कि मानव सभ्यता के प्रारंभिक काल में यूरोप में भी इसकी पूजा की जाती थी।

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शास्त्रों में वर्णित है कि शिवलिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास है। विज्ञान में उल्लेख है कि शिवलिंग में प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन होते हैं। ये तीनों मिलकर एक परमाणु का निर्माण करते हैं। आपके लिए सबसे उपयोगी जानकारी यह है कि शिवलिंग में स्थित धनात्मक विद्युत आवेश प्रोटॉन भगवान विष्णु का प्रतीक है। बिना विद्युत आवेश वाला न्यूट्रॉन महेश का प्रतीक है और ऋणात्मक विद्युत आवेश वाले इलेक्ट्रॉन को ब्रह्म कहा जाता है।

इस प्रकार जब हम तीनों अंगुलियों से शिवलिंग पर त्रिपुंड बनाते हैं तो ब्रह्मा विष्णु महेश (प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन) = परमाणु की पूजा कर रहे हैं। जो संतुलन के लिए आवश्यक है, नहीं तो ब्रह्मांड में ऐसी हलचल होगी कि पृथ्वी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

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